भारत-मॉरीशस संबंधों में नया अध्याय: पीएम मोदी ने मॉरीशस में अटल बिहारी वाजपेयी लोक सेवा एवं नवाचार संस्थान का किया उद्घाटन

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 दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने संयुक्त रूप से मॉरीशस के रेडुइट में "अटल बिहारी वाजपेयी लोक सेवा एवं नवाचार संस्थान" का उद्घाटन किया। यह संस्थान भारत-मॉरीशस विकास साझेदारी के तहत स्थापित किया गया है और मॉरीशस में सिविल सेवकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

मॉरीशस में क्षमता निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता

2017 में हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत इस संस्थान को 4.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 39 करोड़ रुपये) के भारतीय अनुदान से तैयार किया गया है। यह संस्थान मंत्रालयों, सार्वजनिक कार्यालयों, अर्ध-सरकारी निकायों और सरकारी उद्यमों में काम करने वाले मॉरीशस के सिविल सेवकों को प्रशिक्षण देने का कार्य करेगा। संस्थान का उद्देश्य न केवल प्रशिक्षण प्रदान करना है, बल्कि इसे लोक प्रशासन में उत्कृष्टता का एक केंद्र भी बनाया जाएगा। इसके तहत शासन अध्ययन, अनुसंधान और भारत-मॉरीशस के संस्थागत संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

आईटीईसी और भारत सरकार की छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों से बातचीत

इस अवसर पर पीएम मोदी ने आईटीईसी (Indian Technical and Economic Cooperation) और भारत सरकार की छात्रवृत्ति प्राप्त पूर्व छात्रों से भी बातचीत की। ये वे छात्र हैं, जिन्होंने भारत में विभिन्न प्रशिक्षण और शिक्षा कार्यक्रमों में भाग लिया है। इन आदान-प्रदान कार्यक्रमों ने भारत और मॉरीशस के बीच मजबूत सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों को और गहरा किया है।

ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता

यह संस्थान हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में भूमिका को और मजबूत करेगा। भारत ने हमेशा ग्लोबल साउथ के देशों के साथ विकास सहयोग को प्राथमिकता दी है, और यह संस्थान उसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह संस्थान भारत और मॉरीशस के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाएगा। भारत की सहायता से यह केंद्र सिविल सेवा और प्रशासनिक सुधारों में मॉरीशस की क्षमताओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

भारत-मॉरीशस साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

इस परियोजना के तहत भारत न केवल मॉरीशस को प्रशासनिक क्षेत्र में समर्थन दे रहा है, बल्कि दोनों देशों के बीच तकनीकी, शैक्षिक और आर्थिक सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। यह केंद्र मॉरीशस के प्रशासनिक तंत्र को और कुशल बनाएगा और गवर्नेंस में भारत की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में मदद करेगा।

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